१० मिनट पढ़ने का समय
हनुमान चालीसा का महत्व
हनुमान चालीसा भक्ति, शक्ति, साहस और संकट मोचन का महामंत्र है। इसे रोज पढ़ने से भय, नकारात्मक शक्तियां, बाधाएं दूर होती हैं और मन में शांति तथा ऊर्जा आती है।
हनुमान चालीसा के लाभ
✓ भय और चिंता का नाश
असीम साहस और मानसिक शक्ति प्रदान करता है।
असीम साहस और मानसिक शक्ति प्रदान करता है।
✓ बुरी शक्तियों से रक्षा
नकारात्मक ऊर्जा और भूत-प्रेत बाधा से बचाता है।
नकारात्मक ऊर्जा और भूत-प्रेत बाधा से बचाता है।
✓ सफलता और विजय
जीवन व करियर की सभी बाधाओं को पार करने में मदद करता है।
जीवन व करियर की सभी बाधाओं को पार करने में मदद करता है।
✓ स्वास्थ्य और ऊर्जा
शारीरिक एवं मानसिक शक्ति बढ़ाता है।
शारीरिक एवं मानसिक शक्ति बढ़ाता है।
सबसे अच्छा समय
• मंगलवार और शनिवार की सुबह
• सूर्योदय के समय या सुबह ८ बजे से पहले
• हनुमान जयंती पर
• किसी भी शुभ कार्य से पहले
पूर्ण हनुमान चालीसा (हिंदी + अर्थ)
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
अर्थ: श्री गुरु जी के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को साफ करके, मैं रघुकुल के श्रेष्ठ श्री राम जी का पवित्र यश गाता हूँ, जो चारों प्रकार के फल (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) देने वाला है।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
अर्थ: जय हनुमान! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। हे वानरों के इश! आप तीनों लोकों में विख्यात हैं।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥
अर्थ: आप श्री राम जी के दूत हैं, अतुलनीय बल के धाम हैं। अंजनी के पुत्र और पवन के पुत्र के नाम से प्रसिद्ध हैं।
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
अर्थ: आप महावीर, पराक्रमी और वज्र शरीर वाले हैं। आप बुरी बुद्धि का नाश करके अच्छी बुद्धि देते हैं।
कंचन बरन विराज सुवेशा। कानन कुंडल कुंचित केशा॥
अर्थ: आपके शरीर का रंग सोने जैसा है, आप सुंदर वेश धारण करते हैं। आपके कान में कुंडल और बाल घुंघराले हैं।
हाथ वज्र और ध्वजा विराजै। कंधे मूँज जनेऊ छाजै॥
अर्थ: आपके हाथ में वज्र और ध्वजा सुशोभित है। आपके कंधे पर मूँज का जनेऊ शोभा देता है।
शंकर स्वयं केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥
अर्थ: आप भगवान शंकर के अवतार और केसरी नंदन हैं। आपका तेज और प्रताप पूरे जगत में वंदनीय है।
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
अर्थ: आप विद्वान, गुणी और अत्यंत चतुर हैं। आप श्री राम जी के कार्य करने के लिए सदा तत्पर रहते हैं।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
अर्थ: आप प्रभु श्री राम जी के चरित्र सुनने में बहुत रस लेते हैं। श्री राम, लक्ष्मण और सीता जी सदा आपके हृदय में निवास करते हैं।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा॥
अर्थ: आपने सूक्ष्म रूप धारण करके माता सीता को दर्शन दिया और विकट रूप धारण कर लंका को जलाया।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥
अर्थ: आपने भीम रूप धारण करके असुरों का संहार किया और श्री रामचंद्र जी के कार्य को सफल बनाया।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥
अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवित किया, जिससे श्री राम जी बहुत प्रसन्न हुए।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥
अर्थ: श्री राम जी ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे प्रिय भाई भरत के समान हो।
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
अर्थ: सहस्र मुख वाले शेषनाग भी आपका यश गाते हैं। ऐसा कहकर श्री राम जी ने आपको गले से लगा लिया।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा। नारद शारद सहित अहीशा॥
अर्थ: सनकादि ऋषि, ब्रह्मा, देवता, नारद, शारदा और शेषनाग सभी आपकी महिमा का गान करते हैं।
यम कुबेर दिगपाल जहां ते। कवि कोविद कहि सके कहां ते॥
अर्थ: यमराज, कुबेर, दिक्पाल आदि भी आपकी महिमा नहीं बता सकते। विद्वान कवि भी आपका वर्णन नहीं कर सकते।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
अर्थ: आपने सुग्रीव का बड़ा उपकार किया। उन्हें श्री राम से मिलाया और राज्य पद दिलाया।
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना॥
अर्थ: विभीषण ने आपका मंत्र स्वीकार किया, जिससे वे लंका के राजा बने – यह सारा जगत जानता है।
जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
अर्थ: आपने हजारों योजन दूर स्थित सूर्य को फल समझकर निगल लिया।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥
अर्थ: प्रभु श्री राम की अंगूठी मुंह में रखकर आपने समुद्र लांघ लिया – इसमें कोई आश्चर्य नहीं।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
अर्थ: जगत में जितने भी कठिन कार्य हों, वे सब आपके अनुग्रह से आसान हो जाते हैं।
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
अर्थ: आप श्री राम जी के द्वार के रखवाले हैं। आपकी आज्ञा के बिना कोई भी अंदर नहीं जा सकता।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥
अर्थ: जो भी आपकी शरण में आता है, उसे सभी सुख मिलते हैं। आप रक्षक हैं, फिर किसका डर है?
आपन तेज तुम्हारो आपै। तीनों लोक हांकते कापै॥
अर्थ: आपका अपना तेज ही आपके लिए पर्याप्त है। आपके नाम से तीनों लोक काँप उठते हैं।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥
अर्थ: आपका नाम सुनते ही भूत और पिशाच पास नहीं आते।
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
अर्थ: हे वीर हनुमान! निरंतर आपका जप करने से सभी रोग और पीड़ाएँ नष्ट हो जाती हैं।
संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
अर्थ: जो मन, कर्म और वचन से आपका ध्यान करता है, हनुमान जी उसे सभी संकटों से छुड़ाते हैं।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा॥
अर्थ: श्री राम जी सबसे बड़े तपस्वी राजा हैं। उनके सभी कार्यों को आपने संभाला है।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥
अर्थ: जो कोई भी आपसे कोई मनोरथ मांगता है, वह असीम जीवन फल प्राप्त करता है।
चारों युग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
अर्थ: चारों युगों में आपका प्रताप प्रसिद्ध है और पूरे जगत में उजाला फैलाता है।
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥
अर्थ: आप साधु-संतों के रखवाले और असुरों के संहारक हैं। आप श्री राम जी के बहुत प्यारे हैं।
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता॥
अर्थ: आप अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता हैं। यह वर माता जानकी ने आपको दिया है।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सादर हो रघुपति के दासा॥
अर्थ: आपके पास राम रसायन (भक्ति) है। आप सदैव आदरपूर्वक श्री राम जी के दास बने रहते हैं।
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अर्थ: आपके भजन से मनुष्य श्री राम जी को प्राप्त कर लेता है और जन्म-जन्मांतर के दुख भूल जाता है।
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥
अर्थ: अंत समय में जो आपका भजन करता है, वह श्री राम जी की पुरी में जाता है और हरि-भक्त कहलाता है।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
अर्थ: जो अन्य देवताओं को मन में नहीं धारण करता और केवल हनुमान जी की सेवा करता है, वह सभी सुख प्राप्त करता है।
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बल बीरा॥
अर्थ: जो वीर हनुमान जी का स्मरण करता है, उसके सभी संकट कट जाते हैं और पीड़ाएँ मिट जाती हैं।
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
अर्थ: जय जय जय हनुमान गोसाईं! आप गुरुदेव की तरह कृपा कीजिए।
जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
अर्थ: जो सौ बार हनुमान चालीसा पढ़ता है, वह बंधनों से मुक्त हो जाता है और महान सुख प्राप्त करता है।
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
अर्थ: जो यह हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसे सिद्धि प्राप्त होती है – यह शिव जी की साक्षी है।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
अर्थ: तुलसीदास सदा श्री हरि के चेले हैं। हे नाथ! आप मेरे हृदय में निवास कीजिए।
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
अर्थ: हे पवन पुत्र! आप संकट हरने वाले और मंगल स्वरूप हैं। आप श्री राम, लक्ष्मण और सीता सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए, हे देवताओं के राजा।